Sandeep Kumar

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लेखनी कहानी -07-Mar-2024

हो जीवन में कितनो दुःख 
उसे हंस-हंस के जीते चलो 
जहर जिंदगी के गम का
आहिस्ता आहिस्ता पीते चलों।।

किसी को ना बोलो किसी को ना प्रतीत होने दो
हर गम को मधु सा सीचते चलो
रहो हमेशा खुश मिजाज
मन मस्त मगन जिंदगी जीते चलो।।

भनक न लगने दो किसी को
धीरज साध धैर्य से बढ़ते चलो
अविरल अडिग कदम बढ़ाए
अपने नव पथ गढ़ते चलों।।

आएंगे मुसाफिर साथ कई
कई छोड़कर चले जाएंगे
यह कर्म धरा है
अपना सुंदर कर्म करते चलो।।

दो दिन की जिंदगी है
सबसे मिल जुल कर बढ़ते चलो
उतार चढ़ाव आते हैं कई जिंदगी में 
यह सब भूला कर हंसते-हंसता रहो।।

संदीप कुमार अररिया बिहार

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6 Comments

Mohammed urooj khan

18-Apr-2024 12:07 AM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Gunjan Kamal

13-Mar-2024 10:13 PM

👌👏

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Babita patel

08-Mar-2024 11:54 AM

V nice

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